भारतीय कृषि आज एक संक्रमण काल से गुजर रही है। एक ओर उत्पादन बढ़ाने का दबाव है, तो दूसरी ओर लागत, जलवायु परिवर्तन और बाज़ार की अनिश्चितता किसानों की आय को प्रभावित कर रही है। इन्हीं व्यावहारिक चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना की शुरुआत की है। यह योजना कृषि को केवल उत्पादन का माध्यम नहीं, बल्कि लाभकारी और टिकाऊ व्यवसाय के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक प्रयास है।
प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना का मूल उद्देश्य
इस योजना का मुख्य उद्देश्य किसानों की शुद्ध आय (Net Farm Income) बढ़ाना है। इसके लिए सरकार उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ खेती में लगने वाली लागत को कम करने पर भी बराबर ध्यान दे रही है।
योजना के अंतर्गत बीज, सिंचाई, कृषि तकनीक और विपणन—चारों क्षेत्रों को एक साथ मजबूत करने की रणनीति अपनाई गई है।
लागत बनाम आय: किसान की सबसे बड़ी चुनौती
खेती में बढ़ती लागत लंबे समय से किसानों की चिंता रही है। उर्वरक, कीटनाशक, डीज़ल और सिंचाई खर्च लगातार बढ़े हैं, जबकि फसल के दाम उतार-चढ़ाव से भरे रहते हैं।
प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना इसी अंतर को कम करने का प्रयास करती है, ताकि किसान को उसकी मेहनत का उचित मूल्य मिल सके।
आधुनिक कृषि तकनीक पर जोर
आज की खेती में तकनीक की भूमिका निर्णायक हो चुकी है। इस योजना के तहत किसानों को आधुनिक कृषि पद्धतियों से जोड़ा जा रहा है।
- उन्नत बीजों का प्रयोग
- बेहतर जल प्रबंधन
- वैज्ञानिक खेती की जानकारी
- संसाधनों का संतुलित उपयोग
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, तकनीक अपनाने से उत्पादन तो बढ़ता ही है, साथ ही जोखिम भी कम होता है।
छोटे और सीमांत किसानों के लिए विशेष महत्व
देश की अधिकांश कृषि जोत छोटे और सीमांत किसानों के पास है। इस योजना में इन्हीं किसानों पर विशेष फोकस रखा गया है।
सरकार का मानना है कि यदि छोटे किसानों को सही सहयोग मिले, तो वे भी आधुनिक और लाभकारी खेती कर सकते हैं।
बाज़ार से जुड़ाव: आय बढ़ाने की कुंजी
केवल उत्पादन बढ़ाना ही पर्याप्त नहीं है, जब तक किसान को अपनी उपज का सही दाम न मिले। प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना किसानों को बाज़ार से जोड़ने की दिशा में भी काम करती है।
इससे किसानों को फसल बेचने के बेहतर अवसर मिलते हैं और बिचौलियों पर निर्भरता कम होती है।
आवेदन प्रक्रिया और क्रियान्वयन
योजना का लाभ लेने के लिए आवेदन प्रक्रिया को सरल रखा गया है, ताकि अधिक से अधिक किसान इससे जुड़ सकें। ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से आवेदन की सुविधा दी गई है।
कृषि विभाग और संबंधित एजेंसियों की भूमिका इस योजना के सफल क्रियान्वयन में महत्वपूर्ण है।
कृषि विशेषज्ञ क्या कहते हैं?
कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यह योजना सही दिशा में उठाया गया कदम है। यदि इसे ज़मीनी स्तर पर प्रभावी ढंग से लागू किया गया, तो इससे किसानों की आय में स्थायी सुधार हो सकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, योजना की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि तकनीक और सहायता किसानों तक कितनी समय पर पहुँचती है।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर प्रभाव
किसानों की आय बढ़ने से ग्रामीण क्षेत्रों में खर्च और निवेश बढ़ता है। इसका सकारात्मक असर ग्रामीण अर्थव्यवस्था और रोजगार पर पड़ता है।
प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना को ग्रामीण विकास के व्यापक परिप्रेक्ष्य में देखा जा रहा है।
निष्कर्ष
प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना भारतीय कृषि को नई दिशा देने की क्षमता रखती है। यह योजना किसानों की व्यावहारिक समस्याओं को समझते हुए बनाई गई है और खेती को अधिक लाभकारी बनाने की दिशा में एक ठोस प्रयास है।
यदि यह योजना ज़मीनी स्तर पर प्रभावी ढंग से लागू होती है, तो आने वाले वर्षों में किसानों की आय और कृषि क्षेत्र—दोनों में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल सकता है।